कल्‍पना चावला का जीवन परिचय, जीवनी, जन्‍म, कैसे मौत हुई थी (Kalpana Chawla Biography)

कल्‍पना चावला का जीवन परिचय, जीवनी, जन्‍म, कैसे मौत हुई थी, पूरी कहानी (Kalpana Chawla Born, Education, Age, Husband, Death, Story)

भारत की पहली भारतीय महिला अन्‍तरिक्ष यात्री कल्‍पना चावला को देश भर की महिलाएं एक आदर्श के रूप में देखती हैं. कल्‍पना ने 2 बार अन्‍तरिक्ष का भ्रमण किया था, कल्‍पना चावला के पहले  राकेश शर्मा जी भारतीय थे जिन्‍होंने अन्‍तरिक्ष का भ्रमण किया था और चाँद पर कदम रखा था.कल्‍पना का सफर भारतीयों के लिए किसी सपने से कम नहीं है, और उन्‍हें नासा में मिलने वाली जिम्‍मेदारियां एवं सफलता भारत का सर ऊॅंचा कर देती हैं, इसीलिए कल्‍पना भारत में आदर्श,सफल और प्रेरणास्‍पद महिला के रूप में देखी जाती हैं।

कल्‍पना ने अपनी पहली उड़ान के बाद कहा था कि रात का जब समय होता हैं, तब मैं फ्लाइट डेक की लाइट कम कर देती हॅू और बाहर गैलेक्‍सी और तारों को देखती हॅू, तब ऐसा महसूस होता हैं कि आप धरती से या धरती के कोई विशेष टुकडे से नहीं आते हेा, बल्कि आप इस सूर्यमंडल का ही हिस्‍सा हो। कल्‍पना भारत के पहले पायलट जे.आर.डी टाटा की प्रेरणा से ही विकसित हुई थी. भारत ने कल्‍पना के सम्‍मान में उनके नाम पर इपने मौसम सेटेलाइट का नाम रखा हैं।- कल्‍पना-1. कल्‍पना के देहांत के बाद उनके पति भारत आये थे और कल्‍पना के भस्‍मावशेषों को हिमालय पर बिखेरा था तकि उनकी आत्‍मा को शांति मिल सके।

कलपना चावला

 कल्‍पना चावला का जीवन परिचय (Kalpana Chawla Life Story)

कल्‍पना चावला का जीवन परिचय, जीवनी, जन्‍म, कैसे मौत हुई थी

कल्‍पना चावला सन्‍ 1994 में,उन्‍हें नासा द्वारा चुना गया और मार्च 1995 में अतंरिक्ष यात्रियों के 15वें समूह में अतंरिक्ष यात्री उम्‍मीदवार के रूप में जॉनसन स्‍पेस सेंटर को रिपोर्ट किया गया। प्रशिक्षण और मूंल्‍याकन का एक वर्ष पूरा करने के बाद, उसे अंतरिक्ष यात्री कार्यालय ईवीए/ रोबोटिक्‍स और कंप्‍यूटर शाखाओं के लिए तकनीकी मुददों पर काम करने के लिए चालक दल के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्‍त किया गया। कल्‍पना चावला  20 नंवबर 1997 को, अतंरिक्ष जाने वाली पहली महिला थी।

कल्‍पना चावला का जन्‍म (Kalpana Chawla Birth)

कल्‍पना चावला का जन्‍म 17 मार्च 1962 में करनाल, हरियाणा में हुआ था। वे भारत के एक हिंदू परिवार से थी। उनके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला और माता का नाम संजयोति चावला था। वह अपने परिवार में 4 भाई बहनों में से सबसे छोटी थी। धर में सब उन्‍हें प्‍यार से मोंटू कह कर पुकारते थे। कल्‍पना के पिता उन्‍हें चिकित्‍साया या शिक्षक बनाना चाहते थे लेकिन कल्‍पना एक इंजीनियर बनना चाहती थी। 1983 में वे एक उड़ान ट्रेनर और विमानन लेखक, जीन पियरे हैरीसन से मिलीं और शादी की और 1990 में एक देशीयकृत संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका की नागरिक बनीं।

कल्‍पना चावला की शिक्षा (Kalpana Chawla Education)

कल्‍पना चावला ने अपनी बीएससी भी 1982 में भारत के ही पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में की उसके बाद वो मास्‍टर की डिग्री करने टेक्‍सास चली गई जहॉ  कल्‍पना ने टेक्‍सास यूनिवर्सिटी से 1984 में एरोस्‍पस इंजीनियरिंग में एमएससी की इसके बाद 1988 में उन्‍होंने कोलोराडो यूनिवर्सिटी से डॉक्‍टरेट की.कल्‍पना की परवरिश उन्‍मुक्‍त माहौल में हुई थी मेहनत को प्रोत्‍साहन मिलता था।

कल्‍पना चावला का परिवार (Kalpana Chawla Family)

Kalpana Chawla with husband

कल्‍पना का जन्‍म संज्‍योथी चावला और बनारसी लाल चावला से यहॉ हुआ था, कल्‍पना की 2 बहनें हैं जिनका नाम दीपा और सुनीता हैं.इसके अलावा एक भाई संजय भी हैं. कल्‍पना ने अमेरिका में पढ़ाई के दौरान वहीं शादी करने का फैसला कर लिया और शादी कर ली इस शादी के बाद कल्‍पना को यूएस की नागरिकता मिल गई

कल्‍पना चावला कार्यक्षेत्र के अनुभव (Kalpana Chawla Career)

1988 में कल्‍पना चावला ने अपनी डॉक्‍टरेट पूरी होते ही नासा एम्‍स रिसर्च सेंटर में पॉवर-लिफ्ट कम्‍प्‍यूटेनल फ्यूइड डायनामिक्‍स (Computational Fluid Dynamics) में काम करना शुरू कर दिया उनका शोथ एयरक्राफ्ट के आस-पास हवा का प्रवाह देखने का था. इस प्रोजेक्‍ट के पूरा होने के बाद फ्लो सॉल्‍वर में मैपिंग के साथ गणना का काम किया।

1993 में कल्‍पना चावला ने ओवरसेटमेथड्स इंक, लोस एटलोस, कैलिफोर्निया में वाईस प्रेसिडेंट और वैज्ञनिक के तौर पर जॉइन किया, यहॉ उनका काम एक टीम बनाकर अन्‍य रिसर्चर के साथ मूविंग मल्‍टीपल बॉडी प्रॉब्‍लम के निवारण को देखना था, विकास और एयरोडायनामिक ऑप्टिमाइजेशन (Aerodynamic Optimization) में जरूरी तकनीकों के प्रयोग के लिए विभिन्‍न प्रोजेक्‍ट्स अलग-अलग पेपर्स कई जर्नल्‍स में प्रकाशित हो रखे हैं।

कल्‍पना चावला का नासा का अनुभव (Kalpana Chawla Experience in NASA)

  1. सन्‍ 1994 में कल्‍पना चावला का चयन हो गया था इसके बाद कल्‍पना चावला ने 1995 में जॉनसन स्‍पेस सेंटर में एक एस्‍ट्रोनॉट की प्रतिभागी के रूप पर एस्‍ट्रोनॉट के 15वें ग्रुप में सम्‍मलित हुई।
  2. एक साल तक प्रशिक्षण और मुल्‍यांकन के बाद वो EVA/रोबोटिक कंप्‍यूटर ब्रांच के एस्‍ट्रोनॉट ऑफिस में टेकिनकल कारण परेशानी के काम के लिए क्रू प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्‍त की गयी।
  3. कल्‍पना चावना को दिए गए रोबोटिक सिचुएशनल अवरेनेस डिस्‍प्‍ले (Situation Awareness Display) और टेस्टिंग स्‍पेस शटल कंट्रोल साफ्टवेयर इन दी शटल, एविओनिकस इंटीग्रेशन लेबोरेटरी में साफ्टवेयर को नियंत्रित करना था।
  4. कल्‍पना चावना नंवबर सन्‍ 1996 में कल्‍पना चावना को STS-87 पर नियुक्‍त किया गया. जनवरी, 1998 में उन्‍हें शटल और स्‍टेशन फ्लाइट के लिए क्रू रिप्रेजेन्‍टेटिव के पर पर नियुक्‍त किया गया.उसके बाद उन्‍होंने एस्‍ट्रोनॉट ऑफिस क्रू सिस्‍टम एंड हैबिटोबिलिटी(Habitability) सेक्‍शन में काम किया।
  5. कल्‍पना चावना सन्‍ 1997में STS-87 और 2003 में STS-107 पर 30 दिन, 14घंटे और 54 मिनट के लिए अंतरिक्ष में गई।

कल्‍पना चावला की मौत कैसे हुई (Kalpana Chawla Death)

1 फरवरी, 2003, की सुबह जब स्‍पेस शटल धरती पर लौट रहा था और कैनेडी स्‍पेस सेंटर पर लैंड करने वाला था. तब लांच के समय एक ब्रीफकेस के आकार का इंसुलेशन का टुकड़ा टूट गया और इसने शटल के उस विंग्‍स को क्षतिग्रस्‍त कर दिया जो कि इसकी री-एंट्री के समय हीट से रक्षा कर रही थी जैसे ही शटल वातावरण में पहुंचा, विंग के अंदर की गर्म हवा ने इसको तोड़ दिया अस्‍थायी क्राफ्ट हिला और लुढ़का और 1मिनट के भीतर ही शिप के सभी क्रू सदस्‍य इसकी चपेट में आ गए जमीन पर गिरने से पहले टेक्‍सास और लुसियाना पर इसका शटल टुटा यह दुर्घटना सन्‍ 1986 में शटल चेलेंचेर में हुए विस्‍फोट के बाद स्‍पेस शटल प्रोग्राम के लिए दूसरी बड़ी दुर्घटना थी।

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